अभी-अभी भारतवर्ष का यह महापुरुष हम सब को छोड़कर चले गए - Shri Atal Bihari Vajpeyi ji | Myrichbeauty.com - Beauty Tips In Hindi

 

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी की मृत्यु के संदेश ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है हाल ही में यह खबर आई है कि एम्स में भर्ती श्री अटल बिहारी बाजपेई जी अब हम सब को छोड़कर इस दुनिया से चले गए हैं यह खबर सुनते ही पूरा भारत वर्ष  मैं शोक की एक लहर दौड़ गई हैलेकिन वह हमेशा हमारे दिलों में अमर रहेंगे  श्री अटल बिहारी वाजपेई जी जैसे प्रधानमंत्री हमें एक महापुरुष के रूप में मिले थे

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी जी की तबीयत पिछले 2 महीने से अत्यंत नाजुक थी लेकिन उन्हें AIIMS में लाइफ सपोर्ट पर रखा गया था

वह हमारे दिलों में एक ऐसी जगह बना कर गए हैं कि हम जन्मों जन्मांतर तक उन्हें याद करेंगे ऐसा नेता भारतवर्ष में ना कोई था ना कोई है और ना कोई रहेगा

उनकी याद  मैं एक उनकी कविता पढ़ लेते हैं जो उनकी प्रिय कविताओं में थी

 

‘मौत से ठन गई’…

 

ठन गई!

मौत से ठन गई!

 

जूझने का मेरा इरादा न था,

मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,

यूं लगा जिंदगी से बड़ी हो गई.

 

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,

जिंदगी सिलसिला, आज कल की नहीं.

 

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं,

लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?

 

तू दबे पांव, चोरी-छिपे से न आ,

सामने वार कर फिर मुझे आजमा.

 

मौत से बेखबर, जिंदगी का सफ़र,

शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर.

बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,

दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं।

 

प्यार इतना परायों से मुझको मिला,

न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला.

 

हर चुनौती से दो हाथ मैंने किए,

आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए.

 

आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है,

नाव भंवरों की बांहों में मेहमान है.

 

पार पाने का क़ायम मगर हौसला,

देख तेवर तूफ़ां का, तेवरी तन गई.

 

मौत से ठन गई.  

                 – अटल बिहारी वाजपेयी , पूर्व प्रधानमंत्री

 

अब हम सभी देशवासी उनकी आत्मा को मोक्ष प्राप्ति के लिए दुआ करेंगे ||

यही प्रार्थना करेंगे कि ऐसा महापुरुष हमारे भारतवर्ष में बार-बार जन्मे

 

अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी के कवि, पत्रकार और प्रखर वक्ता भी थे. भारतीय जनसंघ की स्थापना में भी उनकी अहम भूमिका रही. वे 1968 से 1973 तक जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे. आजीवन राजनीति में सक्रिय रहे अटल बिहारी वजपेयी लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादन भी करते रहे. वाजपेयी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित प्रचारक रहे और इसी निष्ठा के कारण उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लिया था. सर्वोच्च पद पर पहुंचने तक उन्होंने अपने संकल्प को पूरी निष्ठा से निभाया.

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