एसिडिटी दूर करने का घरेलू रामबाण नुस्खा | Myrichbeauty.com - Beauty Tips In Hindi

एसिडिटी में पेट के ऊपरी भाग में जलन होती है और हर के दर्द का एहसास होता है यह जलन खाना खाने के पश्चात होती है इस समस्या में पेट के ऊपर वाले हिस्से में दर्द होता है और भूख नहीं लगती है जिससे खाली पेट डकारे आने लगती है और पेट में गैस बनने लगती है और मुंह का स्वाद बेहद कड़वा सा हो जाता है और एसिडिटी होने वाले व्यक्ति को लूज मोशन की शिकायत हो जाती है यह समस्या आज के टाइम में बहुत आम बात हो गई है हम घरेलू उपायों को अपनाकर इससे छुटकारा पा सकते हैं

एसिडिटी होने के कारण :-

  • वजन के अधिक होने से एसिडिटी होती है
  • खाना खाने के बाद तुरंत सो जाने से भी एसिडिटी की समस्या होती है
  • तला हुआ खाना खाने से एसिडिटी होती है
  • अधिक मात्रा में शराब का सेवन करने से एसिडिटी की समस्या होती है
  • गर्भावस्था में महिलाओं को एसिडिटी की समस्या होती है

नुस्खा :-

  • एक टुकड़ा अदरक
  • नींबू का रस
  • एक चौथाई चम्मच शहद

विधि :-

अदरक को पीसकर उसका रस निकालो फिर उसमें नींबू का रस मिलाएं और शहद मिलाकर इसका सेवन करें  यह आपको एसिडिटी से राहत दिलाएगा

शहद पेट की समस्याओं को दूर करने में मदद करता है

एसिडिटी दूर करने के अन्य उपाय :-

  • आपका एसिड रिफ्लक्स भी पेट में एसिड की मात्रा काफी कम होने का कारण होता है, और ऐसी स्थिति में ही सेब का सिरका आपके काम आता है। इसके लिए एक कप पानी में 1-2 चम्मच कच्चा एवं अशुद्ध सेब का सिरका मिश्रित करें एवं इसका सेवन दिन में एक से दो बार करें।  आप एक चम्मच सेब का सिरका लेकर इसे एक गिलास पानी में मिश्रित करके भी इसका सेवन कर सकते हैं।
  • हरे रसों का सेवन पेट में हुई बदहज़मी सहित कई प्रकार के रोगों के लिए फायदेमंद साबित होता है। हरे रस शरीर को एल्कलाइज़ करते हैं एवं सूजन कम करते हैं, एवं गैस के रसों को नियंत्रित करके भोजन पचाने में भी सहायक होते हैं।  यदि आप भोजन करने के तकरीबन 30 मिनट पहले इनका सेवन करें तो ये सबसे अधिक प्रभावी होते हैं। आप यदि सुबह या शाम के समय भी बदहज़मी का अनुभव कर रहे हैं तो भी आप ऐसे समय में इनका सेवन कर सकते हैं।
  • अगर आपको एसिडिटी या अम्लीयता की समस्या का निवारण योग द्वारा लेना है तो यह एक बहुत ही सकारात्मक और पूरी तरह शरीर के लिए उपयोगी उपाय है। योग के द्वारा एसिडिटी का इलाज बहुत पुरानी और प्रभावी चिकित्सा है। आप चाहें तो किसी विशेषज्ञ की सलाह से एसिडिटी में राहत देने वाले योगासन कर सकते हैं इसके अलावा भुजंगासन, वज्रासन, सूर्य नमस्कार और इसके साथ अनुलोम विलोम तथा भस्त्रिका प्राणायाम भी काफी फायदेमंद होते हैं।
  • बहुत से लोगों को पता है कि एलोवेरा एसिडिटी के उपचार में काफी फायदेमंद सिद्ध होता है। अगर आप अपनी एसिडिटी की समस्या का स्थायी उपचार चाहते हैं तो रोज़ाना खाने से पहले एलोवेरा का रस पिए।
  • बंद गोभी काफी आसानी से आपको बाज़ार में मिल जाएगी। एक कटी हुई गोभी को मिक्सर में डालें और इसका रस निकालें। अब एक गाजर को छोटे टुकड़ों में काटें और मिक्सर में डालकर इसका भी रस निकालें। आप या तो हर दिन गाजर का रस पी सकते हैं या फिर गोभी का रस भी प्रयोग में ला सकते हैं।
  • शहद एक प्राकृतिक उत्पाद है और यह आसानी से सबके घरों में उपलब्ध भी होता है। क्योंकि शहद में कुछ औषधीय गुण भी होते हैं यह पेट की समस्याओं से निजात दिलाने में काफी असरकारी है। एसिडिटी के उपाय के रूप में भी शहद का प्रयोग बहुत ही फायदेमंद होता है. रोज़ सोने के पहले 2 चम्मच शहद का सेवन करें।
  • पपीते में जो एंजाइम पाए जाता है उसे पपेन कहते हैं। यह शरीर में प्रोटीन को घोलने में काफी असरकारी है। आमतौर पर इसका सेवन भोजन करने के बाद किया जाटा है क्योंकि यह आपकी हाजमा शक्ति को बढ़ाता है। यह आसानी से आपके निकट के बाज़ार में उपलव्ध होता है। इसे खाने से कब्ज़ की समस्या से भी आराम मिलता है।
  • केला पोटैशियम से भरपूर होता है और पेट में एसिड उत्पन्न होने की क्रिया को नियंत्रित करता है एवं शरीर को अत्याधिक मात्रा में पेट में उत्पन्न होने वाले म्यूकस के हानिकारक परिणामों से बचाता है। केले में फाइबर होता है  यह हाज़मे की समस्या के निवारण में सहायता करता है। एसिडिटी से तुरंत राहत के लिए एक केला रोज़ खाएं।
  • तुलसी के पत्ते पेट में म्यूकस के उत्पादन में सहायता करते हैं। यह पेट के हानिकारक रसों के प्रभाव से शरीर को बचाता है। अगर किसी को बेचैनी महसूस हो रही हो या पेट के ऊपरी भाग में जलन का अनुभव हो रहा हो तो उसे तुलसी के कुछ पत्ते खा लेने चाहिए।
  • जीरा आपके मुंह में थूक का उत्पादन करके आपके हाजमे में मदद करता है। यह शरीर के मेटाबोलिज्म में भी वृद्धि करता है और पेट की समस्याओं से निजात दिलाता है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का यह मानना है कि जीरे में एक आराम प्रदान करने वाला गुण होता है, जो आपको सीने में जलन से निजात दिलाता है। थोड़े से पानी में एक चम्मच जीरा मिश्रित करके इसका सेवन करें। वैकल्पिक तौर पर जीरा डालकर पानी को उबालें तथा इसके ठंडा होने के बाद इसका सेवन कर लें।
  • आयुर्वेदिक शास्त्र के अनुसार शरीर के तीन मुख्य दोष होते हैं – वात, पित्त और कफ। इलायची में ऐसे गुण होते हैं, जो इन तीनों दोषों को ठीक करके नियंत्रित करने का कार्य बखूबी करने में सक्षम होते हैं। इलायची आपके हाजमे को दुरुस्त करने में काफी मदद करती है और पेट में उठ रही मरोड़ों से राहत प्रदान करता है। अगर आप पानी में इलायची डालकर इसे उबालें तथा इस पानी का सेवन करें, तो इससे आपकी बदहजमी चुटकियों में गायब हो सकती है।
Show Buttons
Hide Buttons